भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer बौद्ध दर्शन का अनात्मवाद (नैरात्मवाद) बौद्ध दर्शन का अनात्मवाद (नैरात्मवाद) चार्वाक को छोड़कर अन्य भारतीय दर्शनों में आत्मा को नित्य , शाश्वत , अमर तत्त्व के रूप में स्वीकार किया गया है। बौद्ध दर्शन का अनात्मवाद का सिद्धान्त आत्मा सम्बन्धी परम्परागत मतों से भिन्नता एवं विपरीतता को दर्शाता है अनात्मवाद बौद्ध दर्शन के केन्द्रीय सिद्धान्त प्रतीत्यसमुत्पाद की ही तार्किक परिणति है। अनात्मवाद के अनुसार आत्मा नित्य , शाश्वत , अमर नहीं है , बल्कि वह भी सांसारिक वस्तुओं की भाँति निरन्तर परिवर्तनशील है। यदि अनात्मवाद को संकीर्ण अर्थ में लिया जाए तो इसका आशय है ‘ आत्मा के अस्तित्व का खण्डन ' या उसकी ' अस्तित्वहीनता ' । ऐसी स्थिति में यह सिद्धान्त उच्छेदवाद के समतुल्य होगा। ऐसा मानने पर मध्यम प्रतिपदा के उनके सिद्धान्त का खण्डन होगा। अत : अनात्मवाद का यह अर्थ स्वीकार्य नहीं है। अनात्मवाद का आशय यह नहीं...