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नारायण गुरु का एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर विचार

नारायण गुरु का एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर विचार   नारायण गुरु का एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर विचार       श्री नारायण गुरु जी ने भारतीय जनता में समत्व, सौहार्द एवं सद्भावना के लिए कार्य किया । उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक सुधार किए । उनका दर्शन था कि “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर मनुष्य के लिए है । मनुष्य का धर्म चाहे कुछ भी हो उसको अच्छा बनना चाहिए”। ------------

नारायण गुरु का आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता का विचार

नारायण गुरु का आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता का विचार   नारायण गुरु का आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता का विचार      श्री नारायण गुरु ने आध्यात्मिक स्वतंत्रता और समाजिक समानता का विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि “ईश्वर न तो पुजारी है और न ही किसान है, वह सब में हैं । सभी पुरुष भगवान की दृष्टि में समान है”। अर्थात “ओम सहोदरीम् सर्वत्र” । समाजिक प्रगति के लिए उन्होंने तीन सुझाव दिए – संगठन, शिक्षा और औद्योगिक विकास । ----------

नारायण गुरु ( Narayana Guru )

नारायण गुरु ( Narayana Guru ) नारायण गुरु ( Narayana Guru )    नारायण गुरु भारत के महान संत एवं समाजसुधारक थे। कन्याकुमारी जिले में मारुतवन पर्वतों की एक गुफा में उन्होंने तपस्या की थी। गौतम बुद्ध को गया में पीपल के पेड़ के नीचे बोधि की प्राप्ति हुई थी। नारायण गुरु को उस परम की प्राप्ति गुफा में हुई। नारायण गुरु ( Narayana Guru ) के दार्शनिक विचार  नारायण गुरु का आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता का विचार नारायण गुरु का एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर विचार