भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer योग दर्शन में ईश्वर विचार योग दर्शन में ईश्वर विचार ईश्वर विचार ( योग में ईश्वर की भूमिका ) योग दर्शन में प्रकृति और पुरुष से भिन्न एक स्वतन्त्र नित्य तत्त्व के रूप में ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया गया है। यही कारण है कि योग दर्शन को ' सेश्वर - सांख्य ' भी कहा जाता है। ईश्वर के सम्बन्ध में पतंजलि ने अपने योगसूत्र में कहा है कि जो क्लेश , कर्म , आसक्ति और वासना इन चारों से असम्बन्धित हो , वही ईश्वर है। यहाँ ईश्वर के सम्बन्ध में निम्न बातें स्पष्ट होती है - ● ईश्वर , अविद्या , अस्मिता , राग , द्वेष और अभिनिवेश , इन पाँचों क्लेशों से रहित है। ● ईश्वर पाप - पुण्य और इन कर्मों से उत्पन्न फल तथा उनसे उत्पन्न वासनाओं ( आशय ) से असम्बन्धित है। ● ईश्वर को एक विशेष पुरुष की संज्ञा दी गई है , जो दुःख कर्म विपाक से अछूता रहता है। परन्तु ईश्वर न कभ...