भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer सांख्य दर्शन का पुरुष विचार सांख्य दर्शन का पुरुष विचार सांख्य दर्शन द्वैतवादी दर्शन है। सामान्यत : जिस सत्ता को अधिकांशत : भारतीय दार्शनिकों ने आत्मा कहा है , उस सत्ता को सांख्य दर्शन में पुरुष की संज्ञा दी गई है। सांख्य दर्शन का पुरुष चारित्रिक रूप से भारत के अन्य दर्शन के आत्म तत्त्व से भिन्न है , क्योंकि सांख्य दर्शन में चेतना को ' पुरुष ' कहा गया है। उल्लेखनीय है कि हम कभी यह नहीं कहते कि पुरुष वह है , जिसमें चेतना होती है , बल्कि चेतना ही पुरुष है। यहाँ इस चेतन तत्त्व को ही पुरुष की संज्ञा दी गई है। पुरुष ज्ञानस्वरूप है। जब तक पुरुष अनादि अज्ञान के कारण अपने आप को शरीर , मन , बुद्धि , अहंकार आदि उपाधियों से युक्त समझता है , तब तक इस पुरुष को सोपाधिक पुरुष कहते हैं। जब यह अनादि अज्ञान समाप्त हो जाता है , तब सोपाधिक पुरुष अपने को जान पाता है कि मैं तो केवल चेतना हूँ। मेरा मन , बुद्धि , शरीर आदि से कोई स...