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चार्वाक दर्शन में प्रमाण विचार Pramana Mimamsa in Charvak Philosophy

भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer चार्वाक दर्शन में प्रमाण विचार Pramana Mimamsa in Charvak Philosophy चार्वाक दर्शन में प्रमाण विचार Pramana Mimamsa in Charvak Philosophy यह दर्शन प्रत्यक्ष को एकमात्र प्रमाण मानता है , इसके अतिरिक्त सभी का खण्डन करता है। यह पाँच तत्त्वों ( पृथ्वी , अग्नि , जल , वायु एवं आकाश ) में केवल चार तत्त्वों ( आकाश तत्त्व को छोड़कर ) को ही मानता है। प्रत्यक्षमात्र प्रमाण चार्वाक का सम्पूर्ण दर्शन उसके प्रमाण विचार पर आधारित है। चार्वाक ने यथार्थ ज्ञान के एकमात्र प्रमाण के रूप में प्रत्यक्ष को स्वीकार किया है।चार्वाक की मान्यता है कि एकमात्र प्रत्यक्ष के द्वारा ही हमें अभ्रान्त एवं निश्चयात्मक ज्ञान प्राप्त होता है। चार्वाक का यह विचार अन्य दार्शनिक विचारों से भिन्न है , क्योंकि अन्य दार्शनिकों ने प्रत्यक्ष के अतिरिक्त कम - से - कम अनुमान को तो अवश्य ही प्रमाण ...