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कौटिल्य ( Chanakya ) का समाज और सामाजिक जीवन

कौटिल्य ( Chanakya ) का समाज और सामाजिक जीवन  कौटिल्य ( Chanakya ) का समाज और सामाजिक जीवन      कौटिल्य ने प्राचीन भारतीय राजनीतिक सामाजिक चिन्तन का अनुकरण किया तथा राजतन्त्र की संकल्पना को आधार बनाकर राज्य को अपने आप में साध्य मानते हुए सामाजिक जीवन में उसे सर्वोच्च स्थान दिया। कौटिल्य के अनुसार, राज्य का उद्देश्य केवल शांति व्यवस्था तथा सुरक्षा स्थापित करना ही नहीं बल्कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के सर्वोच्च विकास और कल्याण में भी योगदान देना है। इस प्रकार कौटिल्य ने भारतीय वर्णाश्रम व्यवस्था को सामाजिक जीवन का आधार माना है। --------------