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Showing posts from November, 2021

एक वस्त्र और उसके धागों के बीच कौन सी कारणता है?

भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer प्रश्न - एक वस्त्र और उसके धागों के बीच कारणता है – असमवायि  समवायि  असमवायि और समवायि दोनों  निमित्त   ------------------------- उत्तर - ( 2 ) न्याय दर्शन में तीन प्रकार के कारण माने गये हैं ये है – उपादान कारण  असमवायी कारण  निमित्त कारण  उपादान कारण उस द्रव्य को कहा जाता है जिसके द्वारा कार्य का निर्माण होता है। असमवायी कारण उस गुण या कर्म को कहते है जो उपादान कारण में समवेत रहकर कार्य की उत्पत्ति में सहायक होता है। निमित्त कारण उस कारण को कहा जाता है, जो द्रव्य से कार्य उत्पन्न करने में सहायक होता है।  समवाय सम्बन्ध के पाँच भेद बताये गये हैं - अवयव-अवयवी सम्बन्ध  गुण-गुणी सम्बन्ध  क्रिया-क्रियावन सम्बन्ध  सामान्य-विशेष सम्बन्ध और  विशेष-नित्य द्रव्य सम्बन्ध  मेज तथा उसके अवयवों का सम्बन्ध अवयव-अवयवी सम्बन्ध है, फलतः समवाय सम्बन्ध है। मेज तथा उसके रंग का सम्बन्ध गुण-गुणी समबन्ध ह...

चित्त और अचित्त ब्रह्म के दो भाग हैं, इस विचार को किसने ठीक ठहराया है ?

भारतीय दर्शन Home Page Syllabus Question Bank Test Series About the Writer प्रश्न - चित्त और अचित्त ब्रह्म के दो भाग हैं, इस विचार को किसने ठीक ठहराया है ?  शंकर मध्व  रामानुज  जैमिनि   ------------------------------------ उत्तर - ( c ) चित्त और अचित्त ब्रह्म के दो भाग हैं, यह विचार रामानुज का है। रामानुज के अनुसार ब्रह्म जगत का उपदान एवं निमित्त कारण है। ब्रह्म के दो रूप है - कारणावस्था एवं कार्यावस्था। कारणावस्था में ब्रह्म अविकृत रहता है। इस अवस्था में सृष्टि कारण रूप में ब्रह्म में ही अव्यक्त रूप में विद्यमान रहती है। ब्रह्म की कार्यावस्था सृष्टि का व्यक्त रूप है। इस समय ब्रह्म अपनी माया शक्ति द्वारा चित्त एवं अचित्त को स्थूल रूप में प्रकट कर देता है। इस प्रकार चित और अचित्त ब्रह्म के ही दो रूप है। चित से चेतन जीव जगत एवं अचित्त से जड़ जगत की उत्पत्ति होती है।