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शंकर द्वारा परिणामवाद का खण्डन

UGC NET General Paper Home syllabus Question Bank About the UGC Net Exam About the Writer शंकर द्वारा परिणामवाद का खण्डन शंकर द्वारा परिणामवाद का खण्डन परिणामवाद का खण्डन – (प्रकृति परिमाणवाद की सिद्धि अनुमान व शब्द प्रमाण से असंभव है)     शंकर के अनुसार सांख्य-योग दर्शनों का परिणामवाद सिद्धान्त प्रमाणों की दृष्टि से खण्डनीय है। क्योंकि अचेतन प्रकृति बिना किसी चेतन सत्ता का आश्रय लिये हुए प्रवृत्त नहीं हो सकती। जैसे स्वर्णादि से बने कंगन के लिए उपादान ( Material) कारण के रूप में स्वर्णकार आदि चेतन आधार प्राप्त होते हैं। वैसे ही चेतन सत्ता का बिना सहारा लिये प्रकृति का सुख , दुःख और मोहात्मक पदार्थों का कारण होना भी आवश्यक है। यदि साधन साध्याभाव से व्याप्त हो तो विरुद्ध हेतु नाम का हेत्वाभास होता है। अतः यहाँ पर उसी प्रकार का विरुद्ध हेतु है जिस तरह किसी वस्तु को नित्य सिद्ध करने के लिए हेतु दें कि ' यह उत्पन्न होती है ' जबकि उत्पन्न होने के कारण वह वस्तु अनित्य (साध्याभाव) स्वयं ही सिद्ध हो जायगी कि यह नित्य नही...