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| साध्य-साधन ( Saadhy-Saadhan ) का स्वरूप |
साध्य-साधन ( Saadhy-Saadhan ) का स्वरूप
गांधी जी के दर्शन में साध्य-साधन के स्वरूप पर विचार किया गया।
गांधी जी के अनुसार, साध्य की पवित्रता जितनी जरूरी है उतनी ही
साधन की पवित्रता है। गांधीवादी नीतिशास्त्र में सत्य को सवोच्च साध्य माना गया है।
अहिंसा को साधन रूप में माना गया है। गांधी जी के अनुसार एक उचित साध्य साधन के
औचित्य का निर्धारण नहीं कर सकता हैं बशर्ते एक उचित साधन यह सुनिश्चित करता है कि
साध्य उचित होगा।
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