![]() |
| कामन्दकीय ( Kamandakiya Nitisara ) सामाजिक व्यवस्था और राज्य के तत्व |
कामन्दकीय ( Kamandakiya Nitisara ) सामाजिक व्यवस्था और राज्य के तत्व
कामन्दकीय नीतिसार राज शास्त्र का एक संस्कृत ग्रन्थ है जिसके
रचयिता कामन्दकी अथवा कामन्दक है। कामन्दकीय नीतिसार पर पाँच टिकाएं उपलब्ध है –
उपाध्याय, निरपेक्ष, आत्मारामकृत, जयरामकृत, वरदराजकृत और शंकराचार्य कृत।
कामन्दकीय नीतिसार में कुल 20 सर्ग अर्थात अध्याय तथा 36 प्रकरण है। जिनमें चार
विषयों – आन्वीक्षिकी, त्रयीविद्या, वार्ता एवं दण्डनीति का प्रतिपादन किया गया
है। कामन्दकीय नीतिसार के चतुर्थ सर्ग में राज्य के सप्तांगो का प्रतिपादन किया
गया है जो है – राजा, आमात्य, राष्ट्र, दुर्ग, कोष और मित्र।
%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%A4%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%20.jpg)
No comments:
Post a Comment